
बिलासपुर।भिलाई नगर के बहुचर्चित करीब 165 करोड़ के यस बैंक घोटाले में अब बड़ा न्यायिक हस्तक्षेप सामने आया है। उच्च न्यायालय की दोहरी पीठ ने आपराधिक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए पूरे प्रकरण की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने का आदेश दे दिया है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की अध्यक्षता वाली पीठ ने 11 मार्च को पारित 56 पृष्ठों का विस्तृत आदेश जारी कर राज्य स्तर पर चल रही जांच पर गंभीर असंतोष जताया।
जांच पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी….
आदेश में साफ संकेत है कि राज्य सरकार की जांच न केवल धीमी रही, बल्कि तथ्यों को सामने लाने में भी असफल रही। न्यायालय ने माना कि यस बैंक की ओर से की गई कार्यवाही “लीपापोती” जैसी प्रतीत होती है और कई महत्वपूर्ण जानकारियां जानबूझकर छुपाई गईं। ऐसी परिस्थितियों में निष्पक्ष और प्रभावी जांच के लिए सीबीआई ही एकमात्र विकल्प बचता है।
यस बैंक पर जानकारी छुपाने का आरोप…
मामले का अहम तकनीकी बिंदु वह रहा, जिस पर मुख्य
न्यायाधीश ने नाराजगी जताई। सुपेला, भिलाई स्थित यस
बैंक शाखा को अनिमेष सिंह के खाते में हुए प्रत्येक
लेनदेन का पूरा विवरण – नाम सहित – प्रस्तुत करने कहा
गया था। लेकिन बैंक ने न केवल अधूरी जानकारी दी,
बल्कि जांच एजेंसियों के समक्ष मनमाने तरीके से तथ्य
पेश किए। कोर्ट ने इसे गंभीर चूक मानते हुए बैंक की
भूमिका पर भी सवाल खड़े किए।
“पोस्टमैन” बनकर रह गई जांच एजेंसियां….
न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी दर्ज किया कि राज्य की जांच एजेंसियां केवल पत्राचार तक सीमित रहीं—जैसे “पोस्टमैन” की भूमिका निभा रही हों। न तो तथ्यों की गहराई में जाने की कोशिश हुई और न ही जिम्मेदार पक्षों की जवाबदेही तय करने की ठोस पहल।
CBI को सौंपे जाएंगे सभी दस्तावेज….
हाईकोर्ट ने दुर्ग-भिलाई के पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया है कि मामले से जुड़े सभी दस्तावेज, साक्ष्य और सूचनाएं तत्काल सीबीआई को सौंपें।
इसमें अनिमेष सिंह द्वारा दर्ज FIR और हितेश चौबे की काउंटर FIR से जुड़ी पूरी जानकारी भी शामिल है।
याचिकाकर्ता के दस्तावेजों को मिली अहमियत….
आदेश में याचिकाकर्ता प्रभुनाथ मिश्रा द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों और उनके द्वारा की गई लगातार पैरवी का भी विस्तृत उल्लेख किया गया है। साथ ही, स्वाभिमान पार्टी द्वारा इस मामले में उठाए गए मुद्दों को भी न्यायालय ने संज्ञान में लिया है।
अब जांच की दिशा बदलेगी….
हाईकोर्ट के इस फैसले ने साफ कर दिया है कि अब जांच की दिशा और गति दोनों बदलेंगी। राज्य स्तर पर उठ रहे सवालों के बीच सीबीआई की एंट्री से इस बहुचर्चित घोटाले में नई परतें खुलने की संभावना बढ़ गई है।




