कोरबा।केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री आवास योजना को सफल बनाने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार और जिला प्रशासन प्रयासरत हैं, वहीं जमीनी स्तर पर बैठे कुछ जिम्मेदारों की मिलीभगत से योजना को पलीता लगाया जा रहा है। पंचायत स्तर पर पदस्थ लोगों पर आरोप है कि वे जिला और जनपद स्तर के कुछ अधिकारियों-कर्मचारियों के संरक्षण में एक आवास का निर्माण दिखाकर दूसरे आवास की राशि आहरण कर रहे हैं। इतना ही नहीं, बिना आवास निर्माण के ही फर्जी जियो टैग कर सरकारी राशि निकाली जा रही है। यही स्थिति मनरेगा में भी देखने को मिल रही है।
ऐसा ही एक मामला विकासखंड करतला अंतर्गत ग्राम पंचायत बेहरचुंवा से सामने आया है। यहां सत्र 2024-25 में रमिला बाई पति विजय कुमार के नाम पर प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत हुआ। प्रथम किश्त की राशि 1 नवंबर 2025 को 40 हजार रुपये हितग्राही के खाते में जमा की गई। 24 जनवरी 2026 को जो फोटो जियो टैग किया गया, वह किसी अन्य हितग्राही के निर्माणाधीन मकान का बताया जा रहा है।
वास्तविकता यह है कि रमिला बाई द्वारा अब तक कोई आवास निर्माण नहीं कराया गया है। आरोप है कि उनकी माता प्यासो बाई पति हेतराम के निर्माणाधीन मकान को ही रमिला बाई का आवास बताकर जियो टैग किया गया, जबकि दोनों के मकान अलग-अलग स्थानों पर हैं। सूत्रों के अनुसार रमिला बाई का मकान ग्राम पंचायत रामपुर में बनाया जा रहा है।
इस पूरे मामले में आवास मित्र, रोजगार सहायक, सचिव और जनपद स्तर के अधिकारी की मिलीभगत का आरोप है। जानकारों का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच किसी स्वतंत्र टीम से कराई जाए, तो कई फर्जी जियो टैग और भ्रष्टाचार के मामले उजागर हो सकते हैं। कार्रवाई और वसूली के अभाव में ऐसे मामलों का हौसला लगातार बढ़ता जा रहा है।