
छत्तीसगढ़ के आबकारी विभाग में भ्रष्टाचार के एक और नए अध्याय का पर्दाफाश हुआ है। शराब घोटाले के बाद अब ‘ओवरटाइम घोटाले’ ने प्रदेश की सियासत और प्रशासन में हलचल मचा दी है। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने इस मामले में होटल कारोबारी अनवर ढेबर को गिरफ्तार कर लिया है।
रायपुर।छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार के खिलाफ जारी अभियान के तहत ईओडब्ल्यू (EOW) ने एक और बड़ी सफलता हासिल की है।
आबकारी निगम (CSMCL) में कर्मचारियों के ओवरटाइम भत्ते के नाम पर हुए करोड़ों रुपये के गबन के मामले में रायपुर के चर्चित कारोबारी अनवर ढेबर को गिरफ्तार किया गया है। मंगलवार को विशेष न्यायालय में पेशी के बाद अदालत ने उन्हें पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।
क्या है ‘ओवरटाइम’ का पूरा खेल?
ईओडब्ल्यू की जांच में सामने आया है कि छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CSMCL) में मैनपावर और प्लेसमेंट एजेंसियों के माध्यम से एक सुनियोजित साजिश रची गई।
- साजिश का तरीका: एजेंसियों ने शराब दुकानों में कार्यरत कर्मचारियों के लिए ‘ओवरटाइम भत्ते’ (Adhisamay Bhatta) के नाम पर भारी-भरकम बिल पेश किए।
- भुगतान का गबन: नियमतः यह राशि कर्मचारियों को मिलनी थी, लेकिन जांच में पाया गया कि ₹100 करोड़ से अधिक की यह राशि वास्तव में कर्मचारियों तक पहुँची ही नहीं।
- कमीशन का सिंडिकेट: एजेंसियों ने यह पैसा कर्मचारियों को देने के बजाय अवैध कमीशन के रूप में निकाला। आरोप है कि यह पूरा पैसा अंततः अनवर ढेबर और उनके सिंडिकेट तक पहुँचाया जाता था।
ED की सूचना पर हुई FIR
इस घोटाले की नींव प्रवर्तन निदेशालय (ED) की एक कार्रवाई से पड़ी। 29 नवंबर 2023 को ED ने तीन व्यक्तियों से ₹28.80 लाख नकद जब्त किए थे और इसकी सूचना छत्तीसगढ़ शासन को दी थी। इसी इनपुट के आधार पर ईओडब्ल्यू ने अपराध क्रमांक 44/2024 दर्ज कर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और आपराधिक साजिश (120B) के तहत जांच शुरू की थी।
राजस्व को प्रत्यक्ष आर्थिक क्षति
विवेचना के अनुसार, वर्ष 2019-20 से 2023-24 के बीच हुए इस घोटाले ने सरकारी खजाने को सीधा नुकसान पहुँचाया। शासन के राजस्व से ओवरटाइम के नाम पर निकाली गई राशि का उपयोग अनधिकृत लाभ के लिए किया गया। ईओडब्ल्यू का दावा है कि अनवर ढेबर इस पूरे नेटवर्क के मुख्य सूत्रधारों में से एक हैं।
अनवर ढेबर पहले से ही अन्य घोटालों में न्यायिक रिमांड पर थे, जिन्हें अब इस नए प्रकरण में गिरफ्तार किया गया है। ईओडब्ल्यू अब रिमांड के दौरान उनसे यह उगलवाने की कोशिश करेगी कि इस ₹100 करोड़ के कमीशन खेल में और कौन-कौन से रसूखदार अधिकारी और बिचौलिए शामिल थे।




