देश

प्राइवेट स्कूल फीस कानून..अब 2026-27 सत्र से लागू होगा नया नियम, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- देर आए दुरुस्त आए….

दिल्ली में प्राइवेट स्कूलों की मनमानी फीस पर लगाम लगाने के लिए बनाए गए नए कानून को लेकर सोमवार, 2 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट में एक बड़ा मोड़ आया। दिल्ली सरकार ने शीर्ष अदालत को स्पष्ट किया कि वह ‘दिल्ली स्कूल एजुकेशन एक्ट 2025’ को चालू शैक्षणिक सत्र में लागू नहीं करेगी, जिससे स्कूलों और अभिभावकों को बड़ी राहत मिली है।

दिल्ली: दिल्ली के प्राइवेट स्कूलों की फीस को पारदर्शी बनाने और अनुचित वृद्धि को रोकने के लिए लाए गए दिल्ली स्कूल एजुकेशन (ट्रांसपेरेंसी इन फिक्सेशन एंड रेगुलेशन ऑफ फीस) एक्ट, 2025 के क्रियान्वयन को एक साल के लिए टाल दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) एस.वी. राजू ने जानकारी दी कि सरकार इसे वर्तमान शैक्षणिक सत्र 2025-26 के बजाय अगले सत्र 2026-27 से प्रभावी करेगी।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी: “विवेक आ गया है”

जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने सरकार के इस फैसले पर संतोष जताते हुए टिप्पणी की— “लगता है अब विवेक (Better Sense) आ गया है।” दरअसल, पिछली सुनवाई में कोर्ट ने इस बात पर चिंता जताई थी कि सत्र के बीच में अचानक ऐसा कानून लागू करना व्यावहारिक रूप से मुश्किल होगा और इससे स्कूलों व लाखों बच्चों पर बुरा असर पड़ सकता है।

क्या है इस कानून के मुख्य प्रावधान?

यह कानून प्राइवेट स्कूलों द्वारा वसूली जाने वाली कैपिटेशन फीस और अतिरिक्त छिपें हुए शुल्कों पर सख्त नियंत्रण लगाता है। इसके प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:

स्कूल लेवल कमेटी (SLFRC): हर प्राइवेट स्कूल को 11 सदस्यीय समिति बनानी होगी, जिसमें प्रबंधन के अलावा 5 अभिभावक और 3 शिक्षक शामिल होंगे।

पारदर्शिता: फीस का कोई भी प्रस्ताव इसी कमेटी द्वारा पास किया जाएगा।

अपील कमेटी: जिला स्तर पर एक अपील कमेटी होगी जो शिकायतों का निपटारा करेगी।

सख्त दंड: नियमों का उल्लंघन करने पर भारी जुर्माने और बार-बार गलती करने पर स्कूल की मान्यता रद्द करने तक का प्रावधान है।

हाई कोर्ट में जारी रहेगी कानूनी लड़ाई….

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हालांकि लागू करने की समयसीमा पर विवाद सुलझ गया है, लेकिन इस कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाला मामला दिल्ली हाई कोर्ट में लंबित है। प्राइवेट स्कूल एसोसिएशंस ने इस एक्ट के कई प्रावधानों को चुनौती दी है। अब आगे की कानूनी दलीलें हाई कोर्ट ही सुनेगा।

अभिभावकों और स्कूलों को मिला तैयारी का समय…

सरकार के इस निर्णय का अभिभावक संगठनों ने स्वागत किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसे अगले साल से लागू करने से स्कूलों को अपनी समितियां गठित करने और नए नियमों के अनुरूप बजट तैयार करने का पर्याप्त समय मिलेगा, जिससे सत्र के बीच में होने वाली उथल-पुथल से बचा जा सकेगा।

Related Articles

Back to top button

You cannot copy content of this page