
अंबिकापुर।अंबिकापुर की विशेष अदालत ने कृषि विभाग के तत्कालीन सर्वेयर राकेश रमन सिंह को आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में दोषी ठहराते हुए तीन वर्ष के कठोर कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। फैसला विशेष न्यायाधीश ममता पटेल की अदालत ने सुनाया। न्यायालय ने कूटरचना, साक्ष्य छिपाने और फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत करने के आरोपों में भी अलग-अलग धाराओं के तहत तीन-तीन वर्ष कारावास एवं दो-दो हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया है। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। आरोपी वर्तमान में सेवानिवृत्त हैं।
185 प्रतिशत से अधिक असमानुपातिक संपत्ति…
अतिरिक्त लोक अभियोजक विवेक कुमार सिंह ने बताया
कि आरोपी के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम,
1988 की धारा 13(1) (ई) सहपठित धारा 13 (2) के तहत
मामला दर्ज किया गया था। जांच में यह तथ्य सामने आया
कि वर्ष 1988 से कृषि विभाग में पदस्थ रहते हुए आरोपी
ने अपनी ज्ञात और वैध आय की तुलना में अत्यधिक व्यय
किया। न्यायालय में प्रस्तुत अभिलेखों के अनुसार ज्ञात
आय 1 करोड़ 12 लाख 90 हजार 400 रुपये थी, जबकि
व्यय 3 करोड़ 22 लाख 42 हजार 124 रुपये पाया गया।
इस प्रकार 2 करोड़ 9 लाख 51 हजार 724 रुपये की
अतिरिक्त राशि, जो 185.57 प्रतिशत असमानुपातिक है,
सिद्ध हुई ।
एसीबी की छापेमारी में खुली संपत्ति की परतें…
एंटी करप्शन ब्यूरो को 29 दिसंबर 2007 को प्राप्त सूचना के आधार पर जांच प्रारंभ की गई। सत्यापन के बाद न्यायालय से तलाशी वारंट प्राप्त कर 30 दिसंबर 2007 को केदारपुर स्थित आरोपी के निवास पर छापेमारी की गई। कार्रवाई के दौरान तीन मंजिला मकान, टोयोटा क्वालिस, टाटा सूमो, स्कूटर और मोटरसाइकिल सहित विभिन्न संपत्तियां सामने आईं। साथ ही आरोपी, उसके पिता और पुत्र के नाम से लगभग 36 एकड़ कृषि भूमि से संबंधित दस्तावेज भी जब्त किए गए।
फर्जी लेखा-जोखा अदालत में नहीं चला…
जांच के दौरान आरोपी ने अपनी आय को वैध साबित
करने के लिए कूटरचित कैपिटल अकाउंट और बैलेंस शीट
प्रस्तुत किए, जिन्हें न्यायालय ने अविश्वसनीय मानते हुए
अस्वीकार कर दिया। न्यायालय के अनुसार आरोपी द्वारा
अर्जित कुल चल-अचल संपत्ति 2 करोड़ 83 लाख 39
हजार 702 रुपये की पाई गई। ज्ञात स्रोतों से प्राप्त आय 1
करोड़ 7 लाख 8 हजार 755 रुपये घटाने पर 1 करोड़ 76
लाख 30 हजार 947 रुपये की संपत्ति का संतोषजनक
स्पष्टीकरण नहीं दिया गया। यह अनुपात 164 प्रतिशत
असमानुपातिक सिद्ध हुआ। संभावित घट-बढ़ के रूप में
10 प्रतिशत की छूट देने के बाद भी अनुपात 154 प्रतिशत
बना रहा।



