
अंक छुपाए गए, ब्लैकलिस्टेड कंपनी को लाभ, मंत्री की चुप्पी संदिग्ध….
रायपुर।छत्तीसगढ़ परिवहन विभाग द्वारा जारी ₹175 करोड़ की राज्यव्यापी इलेक्ट्रॉनिक रोड सेफ्टी एनफोर्समेंट सिस्टम (Electronic Road Safety Enforcement System) की निविदा अब गंभीर विवादों में घिर गई है। इस मेगा प्रोजेक्ट में पारदर्शिता की कमी, चयन प्रक्रिया में अनियमितता और पूर्व-निर्धारित निर्णय के आरोप सामने आ रहे हैं।
तकनीकी अंकों का खुलासा नहीं — पारदर्शिता पर सवाल….
22 दिसंबर 2025 को वित्तीय बोलियां खोली गईं, लेकिन अब तक ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल पर टेक्निकल क्वालिफिकेशन (TQ) के अंक सार्वजनिक नहीं किए गए।
खरीद विशेषज्ञों का कहना है कि तकनीकी अंकों को छुपाना सार्वजनिक खरीद नियमों का सीधा उल्लंघन है और इससे स्वतंत्र समीक्षा व निष्पक्ष जांच असंभव हो जाती है।
कंसल्टेंट पर भी आरोप….
इस परियोजना के मूल्यांकन के लिए नियुक्त कंसल्टेंट KPMG पर आरोप है कि उसने दस्तावेज़ों की जांच केवल प्री-क्वालिफिकेशन स्तर पर की, जबकि
• OEM अनुपालन
• साइबर सुरक्षा मानक
• डेटा गोपनीयता
• सर्विलांस व एनालिटिक्स प्लेटफॉर्म की अनिवार्य जांच
को नजरअंदाज किया गया, जबकि परियोजना में राज्यव्यापी निगरानी और नागरिकों का संवेदनशील डेटा शामिल है।
₹113 करोड़ की असामान्य बोली — व्यवहारिकता पर संदेह…..
एल-1 घोषित की गई कंपनी M/s Technosys Security Systems Pvt. Ltd. ने ₹113 करोड़ की बोली लगाई, जो विभागीय अनुमान से ₹62 करोड़ कम है।
उद्योग विशेषज्ञ सवाल उठा रहे हैं कि क्या इतनी कम राशि में—
• उच्च गुणवत्ता कैमरे
• एनफोर्समेंट सिस्टम
• एआई आधारित एनालिटिक्स
• साइबर सुरक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर
• राज्यव्यापी तैनाती
को बिना Proof of Concept (PoC) संभव बनाया जा सकता है?
कंपनी का विवादित रिकॉर्ड…..
सार्वजनिक रूप से उपलब्ध दस्तावेज़ों के अनुसार, यही कंपनी:
• मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा ब्लैकलिस्ट की जा चुकी है (नॉन-परफॉर्मेंस और गैर-अनुपालन हार्डवेयर के कारण)
• गुवाहाटी स्मार्ट सिटी ITMS परियोजना में अनियमितताओं से जुड़ी रही है, जिसे स्वयं एक मंत्री ने स्वीकार किया
• गाजियाबाद ITMS प्रोजेक्ट में भी विवादों के चलते परियोजना रद्द हुई
मंत्री की चुप्पी — सवालों के घेरे में…..
इन गंभीर तथ्यों के बावजूद, परिवहन विभाग और माननीय परिवहन मंत्री को दी गई लिखित शिकायतों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई।
विशेषज्ञों का कहना है कि ₹175 करोड़ की सार्वजनिक सुरक्षा परियोजना में मौन को निष्पक्षता नहीं माना जा सकता।
हस्तक्षेप की मांग….
अब यह मामला विजिलेंस एजेंसियों और मुख्यमंत्री कार्यालय के संज्ञान में लाने की मांग की जा रही है, ताकि
• सार्वजनिक धन की हानि
• सड़क सुरक्षा से समझौता
• और प्रशासनिक साख को नुकसान
होने से पहले निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जा सके।




