गोवर्धनपुर भूमि प्रकरण में क्षेत्राधिकार उल्लंघन और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आदेश जारी करने का दावा; निष्पक्ष जांच, निलंबन और एफआईआर की मांग…

रायगढ़। जिले की रायगढ़ तहसील के अंतर्गत ग्राम गोवर्धनपुर की भूमि के नामांतरण को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। पत्रकार यशवंत खेडुलकर ने इस मामले में कलेक्टर रायगढ़ को लिखित शिकायत सौंपकर तहसीलदार शिव कुमार डनसेना सहित संबंधित राजस्व अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। शिकायत में जीवित महिला भू-स्वामी को मृत दर्शाकर भूमि के राजस्व अभिलेखों में नामांतरण आदेश जारी किए जाने का आरोप लगाया गया है।
शिकायत के अनुसार, मामला राजस्व प्रकरण क्रमांक 202526410307100001 (संजय उरांव बनाम छत्तीसगढ़ शासन) से संबंधित है। ग्राम गोवर्धनपुर, पटवारी हल्का नंबर 55 की भूमि के इस प्रकरण में शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि तहसीलदार शिव कुमार डनसेना ने अपने क्षेत्राधिकार से बाहर जाकर सुनवाई की और 7 अगस्त 2026 को नामांतरण संबंधी आदेश पारित किया। शिकायतकर्ता का दावा है कि संबंधित ग्राम नायब तहसीलदार रायगढ़ के क्षेत्राधिकार में आता है, इसके बावजूद प्रकरण की सुनवाई अन्य राजस्व न्यायालय में की गई।
मामले का सबसे गंभीर पहलू मूल भू-स्वामी श्रीमती धनमती उरांव को मृत दर्शाए जाने का आरोप है। शिकायत में बताया गया है कि धनमती उरांव, पति स्वर्गीय महत्तर उरांव, निवासी ग्राम हरदी, थाना चंद्रपुर, जीवित हैं। इसके बावजूद कथित तौर पर आवेदक संजय उरांव द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों और पटवारी प्रतिवेदन के आधार पर उनका नाम राजस्व अभिलेख से हटाने का आदेश जारी कर दिया गया। शिकायतकर्ता ने दस्तावेजों की सत्यता और संबंधित राजस्व प्रतिवेदन की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
शिकायत में यह भी सवाल उठाया गया है कि प्रकरण में सामान्य राजस्व प्रक्रिया के अनुरूप विस्तृत जांच और भौतिक सत्यापन किया गया था या नहीं। शिकायतकर्ता ने आदेश पारित करने की प्रक्रिया में कथित अस्वाभाविक तेजी का उल्लेख करते हुए संभावित मिलीभगत और वित्तीय लेनदेन की आशंका जताई है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

यशवंत खेडुलकर ने शिकायत में आरोप लगाया है कि मामला सामने आने के बाद पूर्व आदेश को स्वप्रेरणा से पुनर्विलोकन में लेकर निरस्त करने की प्रक्रिया अपनाई गई। साथ ही, प्रकरण की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराने में लगभग डेढ़ माह की देरी होने का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता ने इस देरी के कारणों की जांच करने और संबंधित अभिलेखों की भूमिका का परीक्षण कराने की मांग की है।
कलेक्टर को सौंपे गए शिकायत पत्र में तहसीलदार और संबंधित पटवारी सहित अन्य राजस्व कर्मचारियों के विरुद्ध निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराने, आरोप प्रमाणित होने पर विभागीय कार्रवाई करने तथा आवश्यकतानुसार एफआईआर दर्ज कराने की मांग की गई है।
शिकायत के साथ नामांतरण आवेदन, आदेश पत्रक, कथित पीड़िता धनमती उरांव एवं कोटवार के शपथपत्र अथवा बयान, पूर्व आदेश एवं निरस्तीकरण आदेश की प्रतियां और प्रमाणित नकल के लिए दिए गए आवेदन की रसीद संलग्न किए जाने का उल्लेख है।
अब इस मामले में जिला प्रशासन की कार्रवाई पर नजर रहेगी। क्या ग्राम गोवर्धनपुर की भूमि के नामांतरण में निर्धारित प्रक्रिया और क्षेत्राधिकार के नियमों का पालन किया गया था अथवा नहीं?जीवित महिला को फ़र्जी दस्तावेजों के सहारे मृत बताकर अपराधिक षडयंत्र रचने वाले जालसाज संजय उरांव एवं उसके इस कृत्य में शामिल तथा सहायक दोषी व्यक्तियों के खिलाफ़ क्या प्रशासनिक कार्रवाई होगी य़ह देखने वाली बात है।


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