बार – बार चिलचिलाती गर्मी में अघोषित बिजली कटौती बंद करो – बिजली बंद से रायगढ़वासी हुए त्रस्त…

रायगढ़।क्या रायगढ़ बिजली विभाग को आम आदमी की तकलीफ नहीं दिखती? एक तरफ पारा 45°C पार कर रहा है, गर्मी में घर की दीवारें तक तप रही हैं, और दूसरी तरफ रोज 4-5 घंटे का शटडाउन थोप दिया जाता है।
“मेंटेनेंस” के नाम पर जनता को सजा क्यों?
मानते हैं कि खुले तारों को कवर्ड करना जरूरी है। लेकिन ये काम दिसंबर-जनवरी की ठंड में क्यों नहीं किया गया? जब बुजुर्ग-बच्चे लू से बेहाल हैं, अस्पताल में मरीज तड़प रहे हैं, तब सुबह 10:30 से दोपहर 2:30 तक – यानी सबसे गर्म समय में – 14 से 42 मोहल्लों की लाइट बंद करना कहां की समझदारी है?
पहले से तैयारी क्यों नहीं?
हर साल गर्मी आती है, हर साल बरसात आती है। ये कोई नई बात नहीं। फिर विभाग आखिरी वक्त पर क्यों जागता है? अगर तकनीकी कारणों से काम अधूरा रह गया था तो उसकी सजा पूरी जनता क्यों भुगते? प्लानिंग की कमी का खामियाजा हम क्यों दें?
इन्वर्टर की सलाह देना मजाक है…
विभाग कहता है “इन्वर्टर का इंतजाम कर लें”। एक आम मजदूर, ठेले वाला, छोटा दुकानदार 4 घंटे का बैकअप कहां से लाएगा? जिनके घर में इन्वर्टर है भी, वो भी रोज 4 घंटे चलाने पर 2 दिन में जवाब दे जाएगा। बिल तो पूरा वसूलते हो, सुविधा आधी क्यों?
आंधी से फॉल्ट = विभाग की नाकामी…
तेज हवा से टहनियां गिरकर लाइन तोड़ देती हैं और रात-रात भर बिजली गायब। ये हर साल की कहानी है। पेड़ों की छंटाई “मेंटेनेंस” का हिस्सा नहीं है क्या? समय पर ट्री कटिंग क्यों नहीं होती?
रायगढ़ की बिजली से त्रस्त जनता की मांग:
- भीषण गर्मी में सुबह 10 से शाम 5 बजे तक कोई शेड्यूल्ड शटडाउन न हो। मेंटेनेंस का काम रात में या सुबह 6-9 बजे किया जाए।
- एक मोहल्ले में हफ्ते में 1 दिन से ज्यादा शटडाउन न हो।
- शटडाउन की सूचना 48 घंटे पहले SMS, अखबार और मुनादी से दी जाए, न कि सुबह-सुबह।
- आंधी-बारिश से होने वाले फॉल्ट रोकने के लिए 15 दिन में पूरे शहर में ट्री कटिंग अभियान चलाया जाए।
बिजली मूलभूत जरूरत है, लग्जरी नहीं। 45 डिग्री तापमान में बिजली काटना अमानवीय है। अगर विभाग जनता की नहीं सुनता तो रायगढ़ की जनता सड़क पर उतरने को मजबूर होगी।




