
रायगढ़।संविधान निर्माता भारत रत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती के अवसर पर ट्रेड यूनियन काउंसिल द्वारा चक्रधर नगर स्थित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया । इस अवसर पर उपस्थित जनसंगठनों के नेतृत्वकारी साथियों ने उनके द्वारा भारत के संविधान निर्माण दिए गए योगदान को स्मरण किया।माल्यार्पण के पश्चात “संविधान एवं मौलिक अधिकार” विषय पर विचार गोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें विधि वेत्ताओ, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपने विचार व्यक्त किए। गोष्ठी का प्रारंभ करते हुए ट्रेड यूनियन काउंसिल के अध्यक्ष शेख कलीमुल्लाह ने कहा कि संविधान ने हमें 6 मौलिक अधिकार,समता का अधिकार, स्वतंत्रता का अधिकार, शोषण के विरुद्ध अधिकार, धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार,संस्कृति एवं शिक्षा का अधिकार, संवैधानिक उपचारों का अधिकार दिया है।

इन मौलिक अधिकारों का धरातल पर क्या स्थिति है. इस पर चर्चा की जाएगी.चर्चा की शुरुआत करते हुए सीनियर एडवोकेट वासुदेव शर्मा (जिला बचाओ संघर्ष मोर्चा) ने अपने संबोधन में संविधान की मूल भावना और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला। गणेश कछवाहा (ट्रेड यूनियन काउन्सिल) ने श्रमिक वर्ग के अधिकारों एवं संविधान द्वारा प्रदत्त सुरक्षा पर विस्तार से चर्चा की।राजेश त्रिपाठी (सामाजिक कार्यकर्ता) ने सामाजिक समरसता एवं समानता के सिद्धांतों को अपनाने की आवश्यकता बताई। वहीं विपिन पंजाबी (हाई कोर्ट अधिवक्ता) ने संविधान में निहित मौलिक अधिकारों की कानूनी व्याख्या करते हुए नागरिकों को जागरूक रहने का आह्वान किया। एडवोकेट मुशर्रफ अली ने कहा कि कानून बनना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि उसका क्रियान्वयन जमीनी स्तर पर होना चाहिए.मदन पटेल (संयुक्त किसान मोर्चा) ने किसानों के अधिकारों एवं वर्तमान परिस्थितियों में संविधान की भूमिका पर अपने विचार रखे। प्रमोद शराफ (बैंकर्स क्लब रिटायर्ड) कहा कि संविधान ने सभी नागरिको समान अधिकार और कर्तव्य दिए हैं लेकिन वर्तमान भारतीय परिपेक्ष में निर्धन कमजोर वर्ग को प्रदत्त अधिकार के परिवर्तन हेतु संगठित प्रयास की आवश्यकता है डॉ.माधुरी त्रिपाठी ( प्रदेश तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ ) ने कहा कि समता का अधिकार प्रभावशाली लोगों के सामने लुप्त होता दिखाई देता है.वेदप्रकाश अजगल्ले ( लघु वेतन चतुर्थ वर्ग कर्मचारी संघ) ने कर्मचारियों के अधिकारों एवं उनके संरक्षण की आवश्यकता पर अपने विचार रखे। प्रवीण तम्बोली (बिलासपुर डिवीजन इंश्योरेंस एम्प्लाइज एसोसिएशन) ने संगठित प्रयासों के माध्यम से संवैधानिक अधिकारों की रक्षा पर बल दिया। इसके अलावा मुकेश पटेल ( दवा प्रतिनिधि संघ ) ने श्रम संहिता पर,विष्णु यादव( पेंशनर्स एसोसिएशन) पेंनशरो की समस्याओं पर,कामरेड समेलाल यादव ( छत्तीसगढ़ किसान सभा) ने भू अधिकार पट्टा के क्रियान्वयन पर अपने विचार रखें. विचार गोष्टी पश्चात इस आशय का प्रस्ताव पारित किया गया कि ” केंद्र सरकार की ओर से माननीय उच्चतम न्यायालय दिल्ली के समक्ष औचित्य शेष नहीं है जिसे समाप्त किया जाना चाहिए” इसका पुरजोर विरोध करते हुए निर्णय लिया गया कि माननीय मुख्य न्यायाधिपति उच्चतम न्यायालय नई दिल्ली एवं माननीय महामहिम राष्ट्रीय महोदय को पोस्टकार्ड द्वारा जनहित याचिका के प्रावधानो को यथावत सुरक्षित रखे जाने हेतु निवेदन किया जायेगा. कार्यक्रम के अंत में साथियों द्वारा ट्रेड यूनियन काउंसिल के पूर्व अध्यक्ष कामरेड गणेश कछुवाहा एवं वर्तमान अध्यक्ष शेख कलीमुल्लाह को शाल श्रीफल तथा माल्यार्पण कर सम्मानित किया गया. अंत में सभी वक्ताओं उपस्थित साथियों ने संविधान की रक्षा एवं उसके मूल सिद्धांतों को बनाए रखने के लिए एकजुट होकर कार्य करने का संकल्प लिया. कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ प्रदेश तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के कार्यकारी अध्यक्ष संजीव सेठी,छत्तीसगढ़ आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका संघ के अध्यक्ष कामरेड अनीता नायक, भारतीय नाट्य संघ (इप्टा ) भरत निषाद,सद्भावना सांस्कृतिक मंच के अध्यक्ष नीलकंठ साहू की भी भागीदारी रही. उक्त जानकारी ट्रेड यूनियन काउंसिल सचिव के श्याम जायसवाल द्वारा दी गयी।



