
राबर्टसन क्षेत्र का ईंट भट्ठा
जब मिट्टी ही बिक जाए तो नींव कहाँ बचेगी….

रायगढ़ की पहचान कभी मजबूत लाल ईंटों से थी। पर आज वही लाल ईंट कानून के लिए चुनौती बन गई है। औरदा से पुसौर मार्ग, राबर्टसन क्षेत्र और खरसिया में प्रतिबंधित लाल ईंटों का निर्माण और भंडारण खुलेआम धड़ल्ले से चल रहा है। ये धंधा सिर्फ ईंट का नहीं, बल्कि पर्यावरण, प्रशासन और भ्रष्टाचार के गठजोड़ की कहानी बयान करता है।
प्रतिबंध के बाद भी क्यों धधक रहे हैं भट्टे?….
छत्तीसगढ़ सरकार ने उपजाऊ मिट्टी बचाने और फ्लाई ऐश के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए मिट्टी से बनी लाल ईंट पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। खनिज विभाग साफ कहता है कि उसने किसी को भी लाल ईंट निर्माण की अनुमति नहीं दी है।
फिर कई इलाकों में जंगल काटकर 10 से 12 ईंट भट्टे चल रहे हैं। कारोबारी खुद कैमरे पर कबूलते हैं, “इसके लिए किसी की अनुमति नहीं ली है, लाल ईंट के लिए अनुमति मिलती भी नहीं है”।
“ऊपर तक पहुंच है” – अवैध कारोबार का सबसे बड़ा हथियार….
इस धंधे की सबसे बड़ी ताकत डर का न होना है। एक कारोबारी का दावा है, “सभी अधिकारियों से ऊपर तक पहुंच है और वह अकेला इस काम को नहीं कर रहा है”। यही वजह है कि “अधिकारियों से पहचान होने के कारण कोई कार्रवाई नहीं होती”।
इनके लिए यह तरीका आसान है। जंगल के बीच 5 से 6 फीट गड्ढा कर भट्ठा लगा दो। पोकलेन मशीन से बड़े पैमाने पर मिट्टी का उत्खनन करो। पूछो तो जवाब मिलता है, “यह एक व्यक्ति का निजी खेत है… इसके लिए कोई अनुमति नहीं लगती”। जबकि सरकारी नियम साफ है: किसी भी स्थान से मिट्टी का उत्खनन और परिवहन करने के लिए विभागों की अनुमति जरूरी है।
प्रशासन की कार्रवाई: निशाना छोटा, सरगना आजाद…
प्रशासन कार्रवाई के नाम पर वाहन जब्त करता है। रायगढ़ में एक सप्ताह में अवैध खनन के 34 वाहन पकड़े गए। खरसिया में भी मुरूम के अवैध उत्खनन पर जेसीबी और टिपर जब्त हुए लेकिन क्या मुख्य लोगों पर कार्यवाही हुई नही?..।
अब असली सवाल भट्टों का है। जब तक भट्टे चलते रहेंगे, मिट्टी खुदती रहेगी। जब्ती सिर्फ ड्राइवर और ट्रैक्टर की होती है। भट्टा मालिक और उसे संरक्षण देने वाला तंत्र हमेशा बचा रहता है।
कीमत चुका रहा है छत्तीसगढ़….
- पर्यावरण: जंगल के बीच गड्ढे खोदकर उपजाऊ मिट्टी की ऊपरी परत खत्म की जा रही है।
- राजस्व का नुकसान: बिना रॉयल्टी लाखों ईंटें शहर की बाजारों में जा रही हैं।
क्या होना चाहिए ? इन रसूखदारों का.…
- भट्टे ध्वस्त हों, सिर्फ वाहनो पर कार्यवाही नहीं: अवैध ईंट भट्टों को चिन्हित कर जेसीबी से ध्वस्त किया जाए। खान एवं खनिज अधिनियम 1957 की धारा 21 के तहत मालिकों पर FIR भी दर्ज की जाए।
- इस पर जिम्मेदारी तय हो: जिस राजस्व मंडल में अवैध ईट भट्टा चले, वहां के पटवारी, खनिज इंस्पेक्टर और थाना प्रभारी की जवाबदेही तय हो।
- ड्रोन से निगरानी: जंगल और खेतों में बने अवैध गड्ढों को ड्रोन सर्वे से पकड़ा जाए।
ईंट की जगह नीति मजबूत करो…
औरदा-पुसौर राबर्टसन क्षेत्र और खरसिया,मार्ग पर लगे ईंटों के ढेर सारे भंडारण सिस्टम की नाकामी का स्मारक हैं। लाल ईंट पर प्रतिबंध सिर्फ पर्यावरण का नहीं, बल्कि अगली पीढ़ी की खाद्य सुरक्षा का सवाल है।
प्रशासन को चुनना होगा कि वह नियमों का रखवाला बनेगा या “ऊपर तक पहुंच” वालों का। और जनता को चुनना होगा कि वह तमाशबीन रहेगी या शिकायत दर्ज कर इस काले साम्राज्य की पहली ईंट निकालेगी।
क्योंकि विकास की इमारत अवैध मिट्टी से नहीं, मजबूत इरादों से बनती है।




