ई-श्रम साथी: अब मोबाइल ऐप पर मिलेगा कारीगर, चौक-चौराहों के चक्कर खत्म….

छत्तीसगढ़ ने श्रमिकों और आम लोगों की सालों पुरानी परेशानी का डिजिटल हल निकाला है। श्रम विभाग का ई-श्रम साथी मोबाइल ऐप अब मजदूर और ग्राहक को सीधे जोड़ रहा है। सबसे बड़ी बात, इस पहल को अपनाने में बिलासपुर जिला पूरे प्रदेश में अव्वल है।
ऐप कैसे करता है काम….
ई-श्रम साथी एक प्लेटफॉर्म पर श्रमिक और नियोक्ता दोनों को लाता है।
- श्रमिकों के लिए: राजमिस्त्री, प्लंबर, इलेक्ट्रिशियन, पेंटर जैसे कारीगर ऐप पर नाम, मोबाइल नंबर, काम का प्रकार और दिहाड़ी दर डालकर फ्री में रजिस्टर कर सकते हैं।
- नागरिकों के लिए: घर बैठे ऐप खोलिए, काम चुनिए और अपने आसपास के सत्यापित कारीगरों की लिस्ट देखिए। पसंद के कारीगर से सीधे फोन पर बात कर रेट तय कीजिए।
तीन बड़े बदलाव….
- बिचौलिये खत्म: ठेकेदार का कमीशन नहीं कटेगा। श्रमिक को पूरी मजदूरी मिलेगी।
- समय और पैसा बचेगा: सुबह चौक पर घंटों इंतजार नहीं करना। ग्राहक को भी भागदौड़ से मुक्ति।
- भरोसा और पारदर्शिता: सभी कारीगर श्रम विभाग से सत्यापित हैं। रेट पहले से तय, इसलिए मोलभाव का झंझट नहीं।
बिलासपुर बना रोल मॉडल….
डिजिटल पंजीयन में बिलासपुर ने 249 श्रमिकों के साथ प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है। कलेक्टर संजय अग्रवाल मानते हैं कि यह ऐप श्रमिकों के लिए सीधा रोजगार और सम्मानजनक आजीविका का रास्ता खोलेगा। जब काम के लिए फोन पर कॉल आएगी तो मजदूर को लाइन में लगने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
ई-श्रम साथी सिर्फ सुविधा नहीं है। यह श्रम का सम्मान है। दिल्ली-एनसीआर जैसे शहरों में जहां रोज लाखों लोग कारीगर ढूंढते हैं, यह मॉडल चौक की भीड़ को मोबाइल की स्क्रीन पर शिफ्ट कर सकता है। काम अब चौक पर नहीं, आपकी जेब में मिलेगा।




