
कोरबा।बंद खातों को सक्रिय करने के लिए माता-पिता, पत्नी पुत्र और पुत्री के आधार का किया इस्तेमाल 426 खातों में 620 फर्जी प्रविष्टियों से करोड़ों की सरकारी योजना में सेंध इंदिरा आवास एवं प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि में कथित तौर पर 79 लख रुपए के गवन के बहुचर्चित मामले में राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो एसीबी ईओडब्ल्यू ने आरोपी कियोस्क संचालक गौरव शुक्ला के खिलाफ विशेष न्यायालय में लगभग 3000 पन्नों की विस्तृत चार्ज सीट प्रस्तुत कर दी है। जांच एजेंसी ने आरोपी पर दस्तावेजों के हेरा फेरी बैंकिंग व्यवस्था की कमियों का दुरुपयोग तथा हितग्राहियों के खातों से अवैध निकासी कर सरकारी धन का गवन करने का गंभीर आरोप लगाया है।
बालको नगर थाना क्षेत्र के ग्राम रूम गढ़ा निवासी गौरव शुक्ला को 16 अप्रैल को राज्य आरती का अपराध अन्वेषण ब्यूरो ने गिरफ्तार किया था एंटी करप्शन ब्यूरो की विशेष अदालत में पेशी के बाद उसे न्यायिक डिमांड पर जेल भेज दिया गया था यहां वह वर्तमान में निरोध है।
जांच में सामने आया कि आरोपी ने बैंक आफ इंडिया के कियोस्क संचालक के रूप में कार्य करते हुए बैंकिंग प्रणाली की कमियों का लाभ उठाया। प्रारंभ में उसने लेमरू क्षेत्र में कियोस्क सेंटर संचालित किया लेकिन बाद में नेटवर्क संबंधी समस्याओं का हवाला देकर केंद्र को अन्यत्र संचालित करने की अनुमति प्राप्त कर ली। इसी दौरान उसने वर्ष 2010 11 से 2017 तक ग्रामीण क्षेत्र के अनेकों खातों का दुरुपयोग कर आवास योजनाओं की राशि पर हाथ साफ किया।
एसीबी की जांच के अनुसार आरोपी ने निष्क्रिय और बंद पड़े खातों को पुनः सक्रिय करने के लिए अपने माता-पिता पत्नी पुत्र पुत्री सहित परिवार के पांच सदस्यों के आधार कार्ड का इस्तेमाल किया। आधार लिंकिंग के बाद बैंक अधिकारियों की यूजर आईडी और पासवर्ड का उपयोग कर जीपीएस (आधार सक्षम भुगतान प्रणाली) को सक्रिय किया गया जिससे बंद खाते फिर चालू हो गए इसके बाद खातों में जमा सरकारी राशि की निकासी कर ली गई।
जांच एजेंसी ने खुलासा किया है कि इस पूरे फर्जी बारे में बैंक के नौ कर्मचारियों की यूजर आईडी का उपयोग किया गया कल 426 खातों में 620 संदिग्ध प्रविष्टियां दर्ज कर घोटाले को अंजाम दिया गया अधिकांश खातों में आधार सत्यापन की निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया जांच में यह सामने आया कि विभिन्न ग्रामों हितग्राहियों के लिए स्वीकृत इंदिरा आवास एवं प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि को वर्ष 2017 के दौरान आरोपी द्वारा नियंत्रित खातों में स्थानांतरित कर लिया गया।
मामले में भारतीय न्याय संगीता एवं भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की गंभीर धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया गया है। एसीबी का दावा है कि उपलब्ध दस्तावेजी साक्ष्य बैंकिंग रिकॉर्ड डिजिटल डाटा और तकनीकी जांच रिपोर्ट आरोपी की संलिप्त की पुष्टि करते हैं।जब न्यायालय में प्रस्तुत 3000 पन्नों की चार्ज शीट के आधार पर मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी।
*यह मामला न केवल सरकारी योजनाओं की राशि में हेरा फेरी का बड़ा उदाहरण माना जा रहा बल्कि बैंकिंग सुरक्षा प्रणाली और निगरानी तंत्र पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है*




