
गुस्ल-ए-पाक, परचम कुशाई व फातिहाख्वानी के साथ तीन दिवसीय उर्स-ए-मुबारक का हुआ आगाज…

रायगढ़। सिविल लाइन स्थित ऐतिहासिक दरगाह शरीफ में हजरत बाबा शेख नजरूल्लाह शाह र.अ. के सालाना उर्स-ए-मुबारक गुरुवार को पूरे अकीदत और परंपरागत रस्मों के साथ आगाज किया गया।
तीन दिवसीय यह उर्स 20 अगस्त से 22 अगस्त 2026 तक चलेगा उर्स की शुरुआत गुस्ल-ए-पाक, परचम कुशाई और फातिहाख्वानी की रस्म के साथ की गई,उर्स के आगाज के मौके पर दरगाह कमेटी के अराकीन, खादिमाने आस्ताना, बाबा के करीबी रिश्तेदार एवं वर्षों से जुड़े अकीदतमंदों के साथ बड़ी संख्या में सभी आम और खास जायरीन मौजूद रहे। दरगाह परिसर में पूरे अकीदत के साथ रस्मों को अदा किया गया और देश-प्रदेश के लिए अमन, भाईचारे एवं खुशहाली की दुआएं की गईं।
उर्स मुबारक में दूर-दराज से पहुंच रहे जायरीन…
हजरत बाबा शेख नजरूल्लाह शाह र.अ. की दरगाह पर हर वर्ष उर्स के दौरान छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों के अलावा दूसरे शहरों और दूर-दराज के इलाकों से भी बड़ी संख्या में जायरीनों का जमावड़ा रहता है। व अकीदतमंद अपनी मन्नतों और मुरादों को लेकर आस्ताना- ए-हजरत बाबा सैय्यद नजरूल्लाह शाह पर हाजिरी देते हैं।
उर्स में दिखेगा अकीदत और भाईचारे का अनूठा संगम…
वर्षो से इस दरगाह की सबसे बड़ी खासियत इसकी कौमी एकता रही है यहां हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई सहित विभिन्न धर्मों के लोग अपनी अकीदत(आस्थाओं) के साथ पहुंचते हैं। यही वजह है कि वर्षों से यह आस्ताना रायगढ़ में गंगा-जमुनी तहजीब और आपसी भाईचारे की एक खूबसूरत मिसाल बना हुआ है।
“निगाहे वली में वो तासीर देखी,
बदलती हजारों की तकदीर देखी…”
उर्स के तीनों दिनों में दरगाह परिसर में सुबह से देर रात तक अकीदतमंदों की आवाजाही बनी रहेगी। जायरीन यहां जियारत के साथ फातिहाख्वानी करेंगे और अपनी मन्नतों व मुरादों के लिए दुआएं मांगेंगे।
उर्स के दौरान आने वाले जायरीन की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए दरगाह कमेटी की ओर से आवश्यक व्यवस्थाएं भी की गई हैं शहर के व बाहर से आने वाले अकीदतमंदों के लिए लंगर-ए-आम का भी इंतजाम किया गया है।
तीन दिनों तक दरगाह परिसर में अकीदत, रूहानियत, भाईचारे और कौमी एकता का ऐसा संगम देखने को मिलेगा, जो इस उर्स (मेला) को खास बनाता है।




