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तेंदूपत्ता मामले में खरीदारों को राहत नहीं: हाईकोर्ट ने 2% ABS शुल्क वसूली के खिलाफ दायर सभी याचिकाएं की रद्द..

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने तेंदूपत्ता वन लॉट की नीलामी में सफल खरीदारों से 2 प्रतिशत एक्सेस एंड बेनिफिट शेयरिंग (एबीएस) राशि की वसूली के खिलाफ दायर सभी रिट याचिकाओं को खारिज कर दिया है. न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ ने आज 13 अगस्त को यह साझा आदेश सुनाया.

बिलासपुर।छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने तेंदूपत्ता वन लॉट की नीलामी में सफल खरीदारों से 2 प्रतिशत एक्सेस एंड बेनिफिट शेयरिंग (ABS) राशि की वसूली को चुनौती देने वाली सभी रिट याचिकाओं को खारिज कर दिया है।

न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ ने इस मामले में साझा आदेश सुनाते हुए राज्य शासन और छत्तीसगढ़ राज्य जैव विविधता बोर्ड के पक्ष में फैसला दिया है।

अदालत के इस फैसले के बाद अब तेंदूपत्ता के व्यावसायिक खरीदारों को खरीद मूल्य की 2 प्रतिशत राशि एबीएस के रूप में जैव विविधता बोर्ड में जमा करानी होगी।

यह पूरा मामला छत्तीसगढ़ राज्य जैव विविधता बोर्ड द्वारा 24 जनवरी 2023 को जारी आदेश और 25 जनवरी 2023 के परिणामी पत्र से जुड़ा था। इन आदेशों के तहत तेंदूपत्ता के सफल बोलीदाताओं से कुल खरीद मूल्य का 2 प्रतिशत एबीएस शुल्क वसूलने के निर्देश दिए गए थे।

याचिकाकर्ताओं ने अदालत में दलील दी थी कि छत्तीसगढ़ में तेंदूपत्ता का व्यापार 1964 के तेंदूपत्ता व्यापार विनियमन अधिनियम के तहत पूरी तरह राज्य के नियंत्रण में है।

जबकि जैव विविधता कानून, 2002 जैव संसाधनों के संरक्षण और उनके व्यावसायिक उपयोग से होने वाले लाभ के समान बंटवारे से संबंधित है। कोर्ट ने कहा कि दोनों कानून अलग-अलग लेकिन एक-दूसरे के पूरक क्षेत्रों में काम करते हैं।

केवल इसलिए कि तेंदूपत्ता सरकारी नीलामी व्यवस्था के माध्यम से खरीदा गया है, व्यावसायिक उपयोग करने वाले खरीदार एबीएस के वैधानिक दायित्व से मुक्त नहीं हो जाते।

न्यायालय ने तेंदूपत्ता को एक प्रमुख जैव संसाधन (Bio-resource) मानते हुए कहा कि खरीद के बाद इसमें किसी प्रकार का प्रसंस्करण (Processing) या अन्य प्रक्रिया होने से भी इसका कानूनी दायित्व समाप्त नहीं होता।

एकलपीठ ने निष्कर्ष निकाला कि 24 नवंबर 2022 का पत्र, 24 जनवरी 2023 का आदेश और 25 जनवरी 2023 का परिणामी पत्र किसी भी प्रकार की अधिकार क्षेत्र की त्रुटि, अवैधानिकता या मनमानेपन से ग्रस्त नहीं हैं।

इसलिए इन आदेशों में हस्तक्षेप का कोई कानूनी आधार नहीं बनता है और सभी याचिकाएं निरस्त की जाती हैं। इस फैसले के साथ ही मामले से जुड़े सभी लंबित अंतरिम आवेदन भी समाप्त हो गए हैं, जिससे तेंदूपत्ता कारोबारियों के लिए एबीएस शुल्क का भुगतान करना अनिवार्य हो गयाहै।

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