14 महीने, 7 इस्तीफे: युवा IPS अधिकारियों का सिस्टम से मोहभंग?

उत्तर प्रदेश कैडर की 2013 बैच की चर्चित आईएस दिव्या मित्तल ने 30 अगस्त को पद से इस्तीफा दे दिया है. पिछले 14 महीनों के भीतर देश भर में 7 युवा IPS अधिकारियों (जिनकी उम्र 40 साल से कम है) ने भी अपनी सेवाएं छोड़ दी हैं. इन घटनाओं ने इस बहस को तेज कर दिया है कि आखिर किस राज्य में सबसे ज्यादा नौकरशाह इस्तीफा दे रहे हैं और इस प्रतिष्ठित नौकरी से नई पीढ़ी के अफसरों का मोहभंग क्यो हो रहा है।
संसदीय और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के आंकड़ों के मुताबिक, किसी एक विशेष राज्य में इस्तीफों की बाढ़ नहीं आई है. हालांकि, उत्तर प्रदेश, बिहार और ओडिशा से हालिया हाई-प्रोफाइल मामले सबसे ज्यादा सुर्खियों में रहे हैं. DoPT की उपलब्ध आधिकारिक रिपोर्ट में IAS/IPS इस्तीफों का राज्यवार आंकड़ा भी नहीं दिया गया है।
देश में IAS अधिकारियों के सबसे ज्यादा स्वीकृत पद (652) यूपी में ही हैं. यहां से ताजा मामला दिव्या मित्तल का है, जिन्होंने 13 साल की सेवा के बाद स्वेच्छा से इस्तीफा दिया है. आईआईटी (IIT) दिल्ली और आईआईएम (IIM) बैंगलोर से पढ़ाई करने के बाद लंदन की करोड़ों की नौकरी छोड़कर आईएएस बनीं दिव्या, मिर्जापुर के लहुरियादह गांव में 75 साल बाद नल से पानी पहुंचाने के लिए काफी मशहूर हुई थीं।
जाने कौन – कौन से राज्य में IAS अधिकारियों ने दिया इस्तीफा…
बिहार: हाल ही में बिहार से दो आईपीएस अधिकारियों, नुरुल होदा और काम्या मिश्रा ने इस्तीफा दिया है।
ओडिशा: भुवनेश्वर में डीसीपी पद पर तैनात 37 साल की युवा IPS अधिकारी जगमोहन मीणा ने भी हाल ही में अपना इस्तीफा सौंपा है।
अन्य राज्य: मध्य प्रदेश से अभिषेक तिवारी, आंध्र प्रदेश से सिद्धार्थ कौशल और उत्तराखंड से लोकेश्वर सिंह जैसे राज्यों से भी हालिया समय में युवा आईपीएस अधिकारियों ने अपनी सेवाएं छोड़ी हैं।
चूंकि उत्तर प्रदेश और बिहार में सिविल सर्वेंट्स की संख्या सबसे अधिक होती है और यहां की नौकरशाही पर मीडिया की नजर ज्यादा रहती है, इसलिए इन राज्यों से सामने आने वाले इस्तीफे राष्ट्रीय स्तर पर सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बनते हैं.
अफसर क्यों छोड़ रहे हैं पावरफुल नौकरी?
हाल ही में इस्तीफा देने वाले 7 युवा आईपीएस अधिकारियों और अन्य IAS के मामलों की स्टडी करने पर इसके तीन प्रमुख कारण सामने आते हैं.
1. राजनीतिक महत्वकांक्षा और वैचारिक कारण…
कई अधिकारी राजनीति में अपनी किस्मत आजमाने के लिए पद छोड़ रहे हैं. बिहार में काम्या मिश्रा का इस्तीफा राजनीति में आने की कवायद माना जा रहा है, वहीं नुरुल होदा ने वक्फ बोर्ड बिल के विरोध में राजनीतिक रुख अपनाते हुए नौकरी छोड़ी।
2. कॉरपोरेट और अंतरराष्ट्रीय मौके…
सरकारी तंत्र के बाहर मिलने वाले शानदार पैकेज और एक्सपोजर भी एक बड़ा कारण हैं. मध्य प्रदेश के अभिषेक तिवारी ने साइबर सिक्योरिटी के बिजनेस में जाने के लिए IPS छोड़ा. आंध्र प्रदेश के सिद्धार्थ कौशल कॉरपोरेट सेक्टर (रिलायंस) में चले गए, जबकि उत्तराखंड के लोकेश्वर सिंह संयुक्त राष्ट्र (UN) की नौकरी के लिए विदेश चले गए।
3. निजी संतुष्टि और नए क्षेत्र…
कई अधिकारी 10-15 साल की सर्विस के बाद जब अपने जीवन के लक्ष्य प्राप्त कर लेते हैं, तो वे लेखन या सामाजिक कार्य का रुख करते हैं. दिव्या मित्तल का इस्तीफा भी इसी दिशा में एक कदम माना जा रहा है. हाल ही में उनकी एक किताब भी छपी है।
क्या वाकई बड़े पैमाने पर अधिकारी नौकरी छोड़ रहे हैं?
सोशल मीडिया पर अक्सर यह दावा किया जाता है कि IAS और IPS अधिकारी बड़ी संख्या में नौकरी छोड़ रहे हैं, लेकिन प्रामाणिक संसदीय आंकड़े एक अलग ही तस्वीर पेश करते हैं।
IAS/IPS में इस्तीफे दुर्लभ हैं: पिछले 30 सालों में तीनों प्रमुख सेवाओं (IAS, IPS, IFS) को मिलाकर सिर्फ 300 अधिकारियों ने ही इस्तीफा या वीआरएस (VRS) लिया है. कुल अधिकारियों की संख्या को देखते हुए इस्तीफे की यह दर 1% से भी कम है।
IRS में सबसे ज्यादा एग्जिट: IAS या IPS की तुलना में IRS अधिकारियों का नौकरी छोड़ने का रुझान बहुत ज्यादा है. 25 नवंबर 2024 को लोकसभा में दिए गए जवाब के मुताबिक, मात्र एक दशक (2014-2024) में 853 IRS अधिकारियों ने इस्तीफा दिया या VRS लिया. इसके पीछे मुख्य कारण यह है कि IRS अधिकारी 10-15 साल बाद बिग-4 ऑडिट फर्मों या लीगल ट्रिब्यूनल में सरकारी वेतन से 3 से 5 गुना ज्यादा पैकेज पर आसानी से चले जाते हैं।
इस्तीफा देना कितना मुश्किल है?
किसी भी ऑल इंडिया सर्विस के अधिकारी के लिए इस्तीफा देना एक लंबी और जटिल प्रक्रिया है।
मंजूरी की शर्त: राज्य सरकार यह जांच करती है कि अधिकारी के खिलाफ कोई सरकारी बकाया, सतर्कता मामला या भ्रष्टाचार की जांच तो पेंडिंग नहीं है.
अंतिम मुहर: IAS के मामले में प्रधानमंत्री (DoPT मंत्री के रूप में), IPS के मामले में गृह मंत्री और IFS (वन सेवा) के मामले में पर्यावरण मंत्री अंतिम फैसला लेते हैं.
अगर सरकार चाहे तो जनहित, महत्वपूर्ण पद पर तैनाती या प्रशासनिक निरंतरता का हवाला देकर इस्तीफे को रोक सकती है या टाल सकती है।
IPS से IAS में जाने के लिए इस्तीफा…
आंकड़ों में दिखने वाले कई इस्तीफे पूरी तरह से सेवा छोड़ने के लिए नहीं होते. बहुत से IPS प्रोबेशनर्स ट्रेनिंग के दौरान दोबारा यूपीएससी (UPSC) की परीक्षा देते हैं. जब उनका चयन IPS में हो जाता है, तो वे IPS से तकनीकी इस्तीफा देकर आईएएस जॉइन कर लेते हैं. कोचिंग संस्थानों के अनुमान के मुताबिक, किसी भी बैच के 15-20% IPS अधिकारी अपनी सर्विस रैंक सुधारने के लिए दोबारा परीक्षा देते हैं।
आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि IAS और IPS में सामूहिक इस्तीफे जैसी कोई स्थिति नहीं है. हालांकि, जो बदलाव देखने को मिल रहा है, वह अधिकारियों की प्रोफाइल में है. अब युवा अधिकारी सिर्फ रुतबे के लिए पूरी जिंदगी एक ही ढांचे में बंधकर नहीं रहना चाहते. अगर उन्हें कॉरपोरेट, राजनीति या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर मौके मिलते हैं, तो वे प्रतिष्ठित नौकरी छोड़ने में कोई संकोच नहीं कर रहे हैं।




