बड़ी खबर : केलो नदी के सीने पर कब्जा: इस ग्राम की नदी की धारा मोड़कर, भू-माफिया ने रचा नया खेल प्रशासन मौन…

यह रायगढ़ के ग्राम बोईरडीह, पटवारी हल्का नंबर 8 का गंभीर भू-अतिक्रमण और पर्यावरण उल्लंघन का मामला है।
भू – माफियाओं का जमीन के लिए नदी के बहती प्रवाह पर प्रहार…
स्थान और प्रकृति केलो नदी की सक्रिय धारा के भीतर नदी मद की भूमि पर निर्माण गतिविधि। लोहे के सरियों से नींव जैसी संरचना, रेत का अस्थायी बांध, पानी निकालने के पंप और निर्माण सामग्री मौके पर मिली है।
स्थानीय ग्रामीण सूत्रों का आरोप ….
स्थानीय सूत्रों के अनुसार कैलाश अग्रवाल द्वारा जमीन को “फार्म हाउस” के नाम पर छोटे-छोटे प्लॉट में बेचा गया। अब नदी मद की जमीन पर कब्जे की कोशिश।
ऐसा करना अपराध के श्रेणी में आता है…
राजस्व अभिलेखों में यह क्षेत्र नदी मद की भूमि दर्ज है। नदी के प्रवाह को अस्थायी रूप से मोड़कर निर्माण की तैयारी के संकेत हैं जो कानूनी तौर पर अपराध है।
इससे जुड़े संभावित कानूनी और पर्यावरणीय उल्लंघन…
राजस्व संहिता*: नदी मद, नाला, तालाब की जमीन शासकीय होती है। इस पर कब्जा या विक्रय अवैध है। छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता 1959 के तहत कड़ी कार्रवाई बनती है।
पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 + वाटर एक्ट 1974*: नदी की प्राकृतिक धारा बदलना, बांध बनाना, अतिक्रमण करना पर्यावरणीय अपराध है। NGT भी ऐसे मामलों में सख्त रुख लेता है।
नदी संरक्षण नियम क्या है :-
नदी के क्षेत्र में कोई स्थायी निर्माण नहीं हो सकता। अतिक्रमण से बाढ़ का खतरा और जल प्रवाह बाधित होता है।
इस पर आगे क्या हो सकता है :-
राजस्व विभाग और SDM द्वारा सीमांकन और जांच।
यदि नदी मद साबित होती है तो अतिक्रमण हटाने का आदेश और FIR दर्ज हो सकती है।पर्यावरण विभाग और जल संसाधन विभाग से भी नोटिस जारी हो सकते हैं।
यह मामला रायगढ़ में पहली बार सामने आया जिसमे नदी पर अतिक्रमण किया गया है।




