सेवानिवृत्त वृद्व को शासकीय शिक्षक ने अपने ही भाई-भाभी के साथ मिलकर किया 11 लाख रूपये की ठगी …
रायगढ़।विद्यार्थियों को ईमानदारी की शिक्षा देने वाले शिक्षक वो भी शासकीय शिक्षक ही यदि धोखाधड़ी करने लगे तो गुरू की शिक्षा व्यर्थ है ऐसा ही एक मामला रायगढ़ न्यायालय के आदेश से थाना चक्रधर नगर को एफआईआर करना पड़ा है।
एक शासकीय शिक्षक नितिन कुमार मिश्रा जो कि पतरापाली शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में पदस्थ है उसके द्वारा अपने भाई निशांत मिश्रा जिसकी बाद में मृत्यु हो गई एवं अपनी भाभी सौभाग्य लता मिश्रा के साथ मिलकर सेवा निवृत्त वृद्व व्यक्ति मनोहर लाल नंदे आ. स्व. सोमनाथ उम्र लगभग 68 वर्ष निवासी छोटे अतरमुड़ा रायगढ़ को भारतीय रिजर्व बैंक की योजना के अंतर्गत 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का झांसा देते हुये 11,00,000/-रू. की धोखाधड़ी की गई है जिसकी सूचना पीड़ित मनोहर लाल नंदे के द्वारा थाना चक्रधर नगर में दी गई किंतु पुलिस के द्वारा इन लोगों के विरूद्व प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करने से इंकार कर दिया गया तब पीड़ित के द्वारा अपने अधिवक्ता श्री राजीव कालिया के माध्यम से रायगढ़ जिला न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत किया गया है जिसमें न्यायालय श्रीमान न्यायिक दण्डाधिकारी प्रथम श्रेणी श्री देवाशीष ठाकुर जी के द्वारा इस आशय का आदेश पारित किया गया कि प्रथम सूचना रिपोर्ट पंजीबद्ध कर प्रावधानों के अनुसार विधिवत विवेचना पूर्ण करते हुये अंतिम प्रतिवेदन न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करे जिसका अनुपालन करते हुये थाना चक्रधर नगर पुलिस के द्वारा दिनांक 01/11/2026 को धारा 34, 420, 467, 468, 471 भारतीय दण्ड संहिता 1860 के तहत अपराध क्रमांक 0541/2026 के रूप में श्रीमती सौभाग्य लता मिश्रा पति स्व. निशान्त कुमार मिश्रा एवं नितिन कुमार मिश्रा पिता स्व. बैकुंठ मिश्रा निवासी छोटे अतरमुड़ा रायगढ़ के विरूद्व प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। इन लोगों के द्वारा पीड़ित से भारतीय रिजर्व बैंक की योजना पर 05 वर्ष के लिये धनराशि निवेश करने पर 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज प्राप्त होने का विश्वास दिलाते हुये परिवादी से कुल 11,00,000/-रू. विभिन्न अवसरों पर चेक के माध्यम से प्राप्त किया गया है और नितिन मिश्रा एवं सौभाग्य लता मिश्रा के द्वारा नकली बांड पेपर प्रार्थी को
लाकर दिया गया ।
बीच में निशान्त मिश्रा की मृत्यु हो गई उसके बाद परिवादी को शंका होने पर योजना के बारे में पता लगया तो पता चला कि ऐसी कोई भी योजना भारतीय रिजर्व बैंक की नहीं है तब प्रार्थी को महसूस हुआ कि उसके जीवन भर की कमाई जो कि सेवानिवृत्त के पश्चात ग्रेज्युटी, प्रेविडेंट फण्ड व अन्य स्वत्व के रूप में प्राप्त हुई थी उसे इन लोगों के द्वारा धोखाधड़ी कर ठगी किया गया है। परिवादी की ओर से श्री राजीव कालिया अधिवक्ता के द्वारा पैरवी की जा रही है।
FIR की कॉपी :

पीड़ित का कहना है कि :

धोखा देने के लिये में विश्वास जीतने के लिये ब्याज भी दिया गया बाद में ब्याज देना बंद हुआ तब पता करने पर पता चला कि भारतीय रिजर्व बैंक की ऐसी कोई भी योजना मुझे नहीं दी गई है। ठगबाज के द्वारा दिये गये बांड पेपर कुटरचित एवं फर्जी निकले।
परिवादी के अधिवक्ता श्री राजीव
कालिया का कहना है कि :

आजकल वृद्व व्यक्ति ठगी का ज्यादा शिकार हो रहे है ऐसी परिस्थितियों में अपराध के रोकथाम के लिये विधि अनुसार अपराध पंजीबद्ध होना आवश्यक है ।


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