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Big News – अंततः केलो बिहार के खाली प्लाटों पर निर्माण करने से लगी रोक…

रायगढ़।अधिवक्ता श्री राजीव कालिया एवं उसके सहयोगी अधिवक्ता अनुराग पंडा के माध्यम से केलो बिहार समिति के भूतपूर्व अध्यक्ष गोपाल नायक के द्वारा एक याचिका श्रीमान उप पंजीयक महोदय रायगढ़ के समक्ष इस आशय का प्रस्तुत किया गया है कि “केलो बिहार कॉलोनी में समिति/संस्था के सदस्यों को निवास हेतु भवन निर्मित करने के लिये भू खण्ड का अधिकार पत्र आबंटित किया गया है।

समिति के कुछ सदस्यों के द्वारा अधिकार पत्र प्राप्त होने के पश्चात भी आबंटित भूखण्ड में प्रारंभ से वर्तमान तक निवास हेतु कोई भवन निर्माण नहीं किया गया है और भवन निर्माण करने की पांच वर्षों से अधिक की अवधि व्यतीत हो चुकी है जबकि गृह निर्माण सहकारी संस्था की आदर्श उपविधियां की उपविधि क्रमांक 43 (1) भूखण्ड / भवन का हस्तांतरण की कंडिका में इस आशय का उल्लेख व उपविधि है कि सदस्य को भूखण्ड प्राप्त करने के अधिकतम 05 वर्ष की अवधि के अन्दर भवन निर्मित करना आवश्यक होगा।

यदि सदस्य 05 वर्ष की अवधि में भवन का निर्माण नहीं कर सका तो भू खण्ड संस्था के भू पक्ष में समर्पित हो जावेगा । ” जिसमें आवेदक के याचिका के आधार पर श्रीमान उप पंजीयक महोदय रायगढ़ के द्वारा दिनांक 04/05/2026 को अध्यक्ष केलो बिहार समिति को इस आशय का आदेश दिया गया है कि समिति ऐसे समस्त सदस्यों को जिन्होंने निर्धारित 05 वर्ष की अवधि के पश्चात भी निर्माण कार्य पूर्ण नहीं किया गया है तत्काल कारण बताओ नोटिस जारी करें तथा निर्धारित समय सीमा के भीतर संतोष जनक उत्तर प्राप्त न होने की स्थिति में भूखण्ड आबंटन निरस्तीकरण,भूखण्ड का पुनः अधिग्रहण तथा पुनः आबंटन की कार्यवाही प्रारंभ की जावें एवं निर्माण कार्य पर तत्काल प्रभाव से यथा स्थिति बनाये रखते
हुये रोक लगाई जावें ।

उल्लंघन की स्थिति में आवश्यकतानुसार स्थानीय प्रशासन / नगर निगम के सहयोग से वैधानिक कार्यवाही सुनिश्चित की जाये । अब यह देखना होगा कि जो भूखण्ड के अधिकार पत्र प्राप्त करने के बावजूद वर्तमान तक निर्माण नहीं किये है और
जो वर्तमान में इस याचिका के लगने के पश्चात तेजी से अपना निर्माण कर रहे है और जिनका निर्माण अभी पूर्ण नहीं हुआ है निर्माण पर रोक लगने के आदेश के पश्चात क्या वे अपना घर बना सकेगें ?या खाली भूखण्डों को समिति अपने में सम्मिलित कर आवश्यकता धारियों विशेषतया उपविधि क्रमांक 06 में उल्लेखित अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति व कमजोर वर्ग के व्यक्तियों को नियमानुसार प्राथमिकता क्रम का निर्धारण कर आबंटित करेगी।

अभी-अभी नव निर्मित समिति के समक्ष चुनौती के रूप में एवं नई जिम्मेदारी के रूप में देखा जा रहा है। इस आदेश से
कईयों की नींद उड़ गई है कुछ लोगों का यह भी कहना है कि देर से सही किंतु दुरूस्त आदेश उप पंजीयक महोदय के द्वारा दिया गया है ऐसे किसी नियमानुसार प्रभावशाली आदेश की आशा व परिकल्पना लोग कर रहे थे। इससे सिद्ध होता है कि नियम सभी के लिये समान है और नियमों का पालन होना चाहिए। जरूरतमंद जिन व्यक्तियों को अभी तक भूखण्ड प्राप्त नहीं हुआ है ऐसे नियम के जानकारों के द्वारा उप पंजीयक महोदय के इस प्रकार के फैसले का स्वागत किया जा रहा है।

मामले में पैरवी कर रहे अधिवक्ता राजीव कालिया का इस विषय पर कहना है की

‘कॉलोनी का जिस उद्देश्य से निर्माण किया गया था उसका उद्देश्य मूल रूप से शासकीय कर्मचारियों को जिनके पास
आवासीय मकान उपलब्ध नहीं हो ऐसे आवश्यकताधारी कर्मचारियों को सस्ते दरों में भूखण्ड उपलब्ध करवाना था किंतु कॉलोनी के उद्देश्यों को केवल आंशिक सफलता ही प्राप्त हुई है क्योंकि कुछ रिक्त भूखण्डों में 05 वर्ष के भीतर आवासीय निर्माण नहीं हुये है और कुछ भू खण्डों पर व्यवसायिक निर्माण हो गये है इससे प्रतीत होता है कि ऐसे व्यक्तियों को आवास की आवश्यकता नहीं है इसलिये ऐसे रिक्त भू खण्डों को जरूरत
मंदों को नियमानुसार आबंटित करने की आवश्यकता है।’

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