
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने शिक्षाकर्मियों को बड़ा झटका देते हुए स्पष्ट कर दिया है कि पंचायत विभाग के अंतर्गत नियुक्त शिक्षाकर्मी, स्कूल शिक्षा विभाग के नियमित शिक्षकों के समान वेतनमान और सेवा लाभ पाने के हकदार नहीं हैं।
कोर्ट ने इस मामले में दायर अपील को खारिज करते हुए सिंगल बेंच के फैसले को बरकरार रखा है।
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविन्द्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि 10 मार्च 2017 का परिपत्र केवल स्कूल शिक्षा विभाग के नियमित सरकारी शिक्षकों पर लागू होता है, न कि पंचायत कैडर के शिक्षाकर्मियों पर। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पंचायत विभाग के अंतर्गत दी गई सेवाओं को स्कूल शिक्षा विभाग की सेवा के समकक्ष नहीं माना जा सकता।
दरअसल, याचिकाकर्ता शिक्षाकर्मी वर्ग-2 और वर्ग-3 के रूप में पंचायत विभाग के तहत नियुक्त हुए थे। बाद में उनकी सेवाएं नियमित कर उन्हें राज्य सरकार की नीति के तहत स्कूल शिक्षा विभाग में समाहित किया गया।

याचिकाकर्ताओं द्वारा जिन पूर्व फैसलों का हवाला दिया गया, उनमें लाभ पाने वाले सीधे सरकारी शिक्षक के रूप में नियुक्त थे, जबकि वर्तमान मामले में याचिकाकर्ता पंचायत विभाग के तहत नियुक्त शिक्षाकर्मी थे। इसलिए दोनों स्थितियों को समान नहीं माना जा सकता।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में दो टूक कहा कि पंचायत नियमों से संचालित शिक्षाकर्मी, स्कूल शिक्षा विभाग के शिक्षकों को मिलने वाले वेतनमान या अन्य सेवा लाभों के पात्र नहीं हैं।




